शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

नया

आ रहा है नया साल कुछ काम तो कर ले नया।
इस जमी औ आसमा को तोहफ़े तो देवे नया।।
पर नवीनता की घिन्नी में न हो पुरातनता बया।
सुख-शांति की सरिता बहा बैर-भाव से करे हया।।
समय की कीमत है क्या इसे सब पहचाने सदा।
सरसता समरसता सदासयता सदाचरण सोहै सदा।।
जात पात विषबेल को नवभारत से मिटाये जरा।
डिग्रियों तले युवाओं को नौकरियां दिलाये जरा।।
सभ्य होने की ओट में फैलीअसभ्यता देखे यहाँ।
नव यन्त्र तन्त्र में रची बसी कुरीतिया मेटे यहाँ।।
छोड़कर सब क्लेश क्लैसिक कल्चर बनाये नया।
क्षेत्रवादी भावना तोड़ देशवादी भावना जगाये नया।।
हम मराठी गुजराती राजस्थानी बिहारी क्यो है यहाँ।
सम्पूर्ण भारतवासी एकसूत्र में बध भारतीय बने यहाँ।।
योग्यता का सम्मान कर अयोग्यता मिटाना है यहाँ।
काट सभी विषमता को योग्यता दीप जलाना है यहाँ।।
विपदा नशा नाश कर हर दिल सुआस भर देवे नया।
हर भारतीय एकता अखंडता समग्रता को रखें नया।।
मूलभूत सुविधाओं की हो न कभी इस धरा
पर कमी।
हर भारतीय तन मन दिल दिमाग हो महफ़ूज व धनी।।

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