बुधवार, 1 जनवरी 2014

सकल परम गति के अधिकारी

कृत कर्म कृत काल में सभी माने सही !
काल काल है जाने जन पर माने नहीं !!
सत असत स्वभाव वश फैले हर कही !
दिखता दिन रात गुन दोष है इस मही !!१!!
निज करम धरम को ही मानते भारी !
पर खोट देखन में रत है दुनिया सारी !!
विरत धरम करम रत निनानवे झारी !
पाखंडी भी बन पंडित देवे ज्ञान भारी !!२!!
फैलावे जग जंजाल जगावे जुग जारी !
सरम त्याग बे सरम चाहते सुख सारी !!
बेवकूफ है इनकी नजर श्रम शर्म कारी !
गुन त्याग अवगुन गह की ये महामारी !!३!!
पूरब प्रतीक पिछड़े पन पुरातन पारी !
पाश्चात्य आग में लिपट सुखी  भारी !!
खुद जल जलावे सबै कपटी नर नारी !
पर है सकल परम गति के अधिकारी !!४!!   

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    गये साल को है प्रणाम!
    है नये साल का अभिनन्दन।।
    लाया हूँ स्वागत करने को
    थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
    है नये साल का अभिनन्दन।।...
    --
    नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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