"मानस का मर्म: हँसते-हँसते लोटपोट"
महंगाई का 'मानस' दर्शन
"देखिए, हमारी पत्नी ने कहा- 'मानस', घर में आटा खत्म हो गया है, कुछ ले आइए।
मैंने कहा- तुम भी अजीब हो, आटा खत्म हुआ है तो क्या हुआ?
सब्जी तो है ना?
बोली- सब्जी तो तब बनेगी जब गैस होगी।
मैंने कहा- तो तुम भी कमाल करती हो,
जब पेट में भूख है, तो गैस की क्या जरूरत है?"।।१..
बढ़े दाम इतने यहाँ, हो गई है अब लार,
नेता जी की जेब में, फूला है व्यवहार।
फूला है व्यवहार, आमजन रोता बैठा,
महँगाई के बोझ से, 'मानस' है अब ऐंठा।
नेता जी कहते सुनो, "विकास आया द्वार,
खाओ तुम भी मजे से, मूँगफली की धार।"।।२.....
एक आदमी गया बैंक में, बोला- "लोन चाहिए।"
बैंक वाले ने पूछा- "क्यों?"
उसने कहा- "सब्जी खरीदनी है।"
बैंक मैनेजर हँसा- "भाई, सब्जी के लिए लोन?
क्या सब्जी में सोना लगा है?"
वह बोला- "नहीं साहब, सब्जी में सोना नहीं,
पर सब्जी लेने के लिए 'गोल्ड लोन' ही बचा है!"
हम हँसते हैं, पर हँसने की उम्र नहीं है,
यह तो जेब कटने की, एक सुखद प्रक्रिया है।
लोग कहते हैं- "अच्छे दिन आए हैं,"
पर गौर से देखिए, ये 'अच्छे दिन' भी
ईएमआई (EMI) पर लाए हैं!।।३.....
[अंतिम पंक्तियाँ - लोटपोट होने के लिए]
जेब में छेद है पर, ठाठ निराले हैं,
सड़कों पर आज कल, भूखे भी मतवाले हैं।
'मानस' की कलम चले, नेता जी की चाल पे,
हँस-हँस के आप गिरें, अपनी ही बेहाल पे!।।४.....
मानस की दुविधा
मदद करने के चक्कर में, दुनिया हुई बेहाल,
'मानस' फँसा पड़ा है अब, लेकर अपना हाल।
सुबह उठा तो लगा कि, बदल गया है दौर,
दफ्तर की फ़ाइलें कह रहीं, "कर लो थोड़ा शोर।"
पत्नी ने आवाज़ दी, "सुनो जी ओ 'मानस',
बाजार से लाओ जरा, थोड़ा सा तो रशन।
तेल के भाव देखो, मानों सोना बिकता है,
मूँगफली के भाव में, यहाँ आदमी पिसता है।"
मैंने पूछा- "क्या हम, घास भी खा सकते हैं?"
बोली- "घास के भी अब, रेट बढ़ सकते हैं।
क्योंकि उसे भी काटने वाली, मशीन अब स्मार्ट है,
'मानस', यह समझ लो कि, जेब ही अपनी फट है।"
दफ्तर की मीटिंग में, बॉस ने फरमाया है,
"काम का प्रेशर ही, जीवन का साया है।"
मैंने कहा- "सर, काम तो होता रहेगा,
पर चाय और बिस्किट का, बिल कौन भरेगा?"
वह बोले- "तुम तो 'मानस', बड़े ही ज्ञानी हो,
पगार में ही तो छुपी, महँगाई की कहानी हो।
कम खर्च करो, ज्यादा काम की आस लगाओ,
हवा में ही तुम तो, अब पेट को सजाओ।"
आदमी अब आदमी को, देख मुस्कुराता है,
कि किसके पास कितने, खाली हाथ आता है।
'मानस' अब सोचता है, ये कैसी है आजादी,
पगार के नाम पर बस, मिलती है बर्बादी।
निकल पड़े हैं सब अब, अपनी ही चाल पे,
हँसते हैं लोग यहाँ, खुद के ही हाल पे।
'मानस' कलम उठाए, तो दुनिया खिलखिलाती है,
व्यंग्य की चोट देखो, कैसे असर दिखाती है!
आधुनिक तकनीक का 'मानस'
'मानस' ने लिया मोबाइल, जैसे कोई वरदान है,
सारे काम छोड़कर, अब इसका ही ध्यान है।
वाई-फाई (Wi-Fi) के पीछे, घूमता पूरा मोहल्ला,
जैसे पानी के लिए, प्यासा कोई छल्ला।
पत्नी ने कहा- "जरा, कूड़ा बाहर डाल आओ,"
बोले- "रुकिए, पहले रील (Reel) पर तो 'लाइक' आ जाने दो!"
डाइट और 'मानस'
'मानस' चला जिम में, फिटनेस का है शौक,
वहाँ जाकर देखा तो, मच गया है खौफ।
मशीन पर दौड़ा ऐसे, जैसे शेर पीछे पड़ा है,
मगर बाहर निकलकर, समोसे पे ही खड़ा है।
बोले- "डाइट तो कल से पक्की, नियम अपना तगड़ा है,
आज तो बस मन को, थोड़ा सा ये पकड़ा है!"
'मानस' और इंटरव्यू
नौकरी के चक्कर में, 'मानस' हुआ परेशान,
इंटरव्यू देने गया, बनके बड़ा विद्वान।
बॉस ने पूछा- "कितनी पगार लेंगे आप?"
'मानस' बोला- "उतनी, जितने में कटे न मेरे पाप।
काम न करने का एक्स्ट्रा, और करने का थोड़ा कम,
ऐसी कंपनी ढूंढ रहा, जहाँ न हो कोई गम!"
रिश्तों का गणित
शादी में 'मानस' पहुँचा, बनकर बड़ा सयाना,
रिश्तेदारों ने घेरा, जैसे हो कोई खजाना।
पूछा- "बेटा! पगार क्या है? शादी कब करोगे?"
'मानस' ने कहा- "सब कर लूँगा, पर पहले ये तो बताओ,
इस 'मुफ्त की सलाह' की, फीस कहाँ भरेंगे?"
रिश्तेदार चुप हुए ऐसे, जैसे इंटरनेट गया हो,
'मानस' हँसा मन में, जैसे कोई युद्ध जीत गया हो!
'मानस' का बजट
महँगाई के साए में, 'मानस' ने लगाया दिमाग,
बोले- "सब्जी के बिना भी, जल सकती है ये आग!"
दाल-रोटी छोड़कर अब, 'डिजिटल डाइट' अपनाई है,
यूट्यूब पे देख के खाना, सबसे बड़ी चतुराई है।
देख के रसमलाई, मन को बहला लेते हैं,
और बिल के वक्त, 'मानस' बस 'ऑनलाइन' हो जाते हैं!
मीटिंग और 'मानस'
ऑफिस की मीटिंग में, 'मानस' सोए थे शान से,
बॉस ने पूछा- "क्या हाल है? काम हुआ क्या काम से?"
'मानस' चौंक कर बोले- "सर, मैं तो ध्यान में था,
आपकी बातों के रहस्य, सुलझाने के विधान में था!"
बॉस भी घबरा गया, अपनी ही तारीफ सुनकर,
'मानस' बच निकले फिर, अपनी चतुराई चुनकर!
डॉक्टर और 'मानस'
'मानस' गया डॉक्टर के पास, बोला- "सब दुखता है भाई,
न चलने में चैन है, न सोने में है मलाई।"
डॉक्टर ने जाँच की, बोला- "सिस्टम सारा ढीला है,
थोड़ा कम सोचिए 'मानस', तनाव बहुत रंगीला है।"
'मानस' बोला- "डॉक्टर साहब, तनाव तो तब कम होगा,
जब इलाज का बिल देख, मेरा बीपी (BP) फिर से न कम होगा!"
पड़ोसी का चक्कर
'मानस' के पड़ोसी हैं, बड़े ही महान,
खिड़की से देखते हैं, घर का सारा सामान।
पूछा- "मानस, क्या मंगाया है आज ऑनलाइन डब्बे में?"
'मानस' बोला- "इसमें मेरी वो खुशियाँ हैं, जो न आती आपके कब्जे में!"
पड़ोसी का चेहरा ऐसा हुआ, जैसे बिजली गुल हो गई हो,
'मानस' की हाज़िरजवाबी पे, पूरी गली दंग हो गई हो।
'मानस' और दुनियादारी
दुनिया कहती है, "मानस, ज़रा संभल के चलिए,"
"ज़माने के हिसाब से, अपने कदम बदलिए।"
'मानस' बोला- "ज़माने के हिसाब से चलूँगा तो,
मैं तो गड्ढे में गिरूँगा, और ज़माना हँसेगा!"
अपनी मर्जी का राजा हूँ, खुद ही अपनी शान हूँ,
मैं तो 'मानस' हूँ साहब, मैं खुद में ही एक जहान हूँ!
दफ्तर का 'मानस'
"देखिए, मेरा बॉस मुझे कहता है कि 'मानस', तुम समय पर दफ्तर क्यों नहीं आते?
मैंने कहा- सर, मैं समय पर ही निकलता हूँ, पर रास्ते में इतने 'विचार' मिल जाते हैं कि भटक जाता हूँ।
बॉस ने कहा- 'काम करो, विचार मत करो!'
मैंने कहा- सर, भारत में काम करने वालों की कमी नहीं है, कमी तो उन लोगों की है जो बिना काम के भी 'काम का ढोंग' करना जानते हैं।
मैं तो 'मानस' हूँ,
दफ्तर जाकर अपनी कुर्सी से अपनी दोस्ती पक्की करता हूँ,
क्योंकि बाकी सब तो दफ्तर में बस अपनी नौकरी पक्की करते हैं!"
महँगाई का तमाशा
महँगाई ने कर दिया, 'मानस' का बुरा हाल,
रुपया तो बीमार है, गिरते इसके बाल।
गिरते इसके बाल, जेब में खनक नहीं है,
'मानस' की थाली में, अब कोई चमक नहीं है।
पेट काट के जोड़ता, नेता जी का दान,
और 'मानस' को थमाते हैं, बस झूठा सम्मान!
पेट भरा हो तो हँसे, खाली पेट न कोय,
महँगाई के राज में, बस चमत्कार ही होय।
सरकारी तंत्र
"मित्रों, हमारे यहाँ एक फाइल है। फाइल का नाम है 'प्रगति'। वह पिछले दस साल से एक मेज से दूसरी मेज पर 'प्रगति' कर रही है। जब भी मैं उसे छूता हूँ, तो मुझे फाइल की आवाज़ आती है- 'मानस, हमें मत छुओ, हम सरकारी दस्तावेज़ हैं, हमें धूल खाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।'
मैंने एक बार बाबूजी से पूछा- काम कब होगा?
वो बोले- 'मानस, काम तो हो जाएगा, पर उसके लिए आपको 'धैर्य' का आवेदन देना होगा।'
मैंने कहा- धैर्य तो मेरा उसी दिन मर गया था, जिस दिन मैंने दफ्तर में 'सुधार' के पोस्टर देखे थे!"
सोशल मीडिया और 'मानस'
"आजकल लोग 'मानस' से पूछते हैं- आप इतने उदास क्यों रहते हैं?
मैंने कहा- उदास नहीं हूँ, बस 'रील्स' नहीं बना रहा।
आजकल आदमी के पास चेहरा है, पर उसे दिखाने के लिए फिल्टर चाहिए।
लोग कहते हैं- 'मानस', फोटो डालो, दुनिया को पता चले तुम क्या खा रहे हो।
मैंने कहा- भाई, मैं जो खा रहा हूँ, वो मेरा पेट जानता है,
दुनिया को बताऊंगा तो उन्हें भी 'बदहजमी' हो जाएगी।
मैं तो 'मानस' हूँ,
बिना फोटो के भी, अपनी खुशियाँ जी लेता हूँ,
क्योंकि आज कल की दुनिया में, बिना 'डिस्प्ले' के भी,
मैं अपना 'स्वैग' जी लेता हूँ!"
दफ्तर का 'मानस' १
मक्खी बैठी मेज पे, 'मानस' हुआ निहाल,
बोले बॉस से हुजूर, ये क्या है हाल-चाल?
काम तो होता रहेगा, फाइल को सोने दो,
मेरी इस थकान को, तुम थोड़ा तो रोने दो।
नौकरी तो बहाना है, तनख्वाह है असली खेल,
पेंशन की उम्मीद में, घिस रहे हम रेल!
महँगाई का दौर
रुपया हुआ है मरियल, जैसे लंगड़ा बैल,
महँगाई के शोर में, 'मानस' हुआ फेल।
'मानस' हुआ फेल, दाल में पानी ज्यादा,
नेता जी का देख लो, झूठा-मूठा वादा।
महँगाई ने काट दी, कमर सभी की यार,
'मानस' अब तो माँगता, सब्जी की उधार!
सरकारी फाइलों का रहस्य
दफ्तर की अलमारी में, फाइलें सोती हैं,
'मानस' के अरमान भी, वहीं रोती हैं।
साहब की मेज पे, कलम चलती धीरे,
'मानस' के काम में, लगे हैं अब तीरे।
भ्रष्टाचार की गंगा में, सब गोते खाएं,
'मानस' अपनी फाइल को, कहाँ ढूंढने जाएं?
सोशल मीडिया का युग
दुनिया है मोबाइल पे, 'मानस' भी है साथ,
रील्स में उलझा हुआ, हर व्यक्ति के हाथ।
हर कोई है 'स्टार' यहाँ, फिल्टर का है जोर,
'मानस' की सादगी पे, हँसता चारों ओर।
सच को छुपाने का, ये कैसा है हुनर,
'मानस' की आँखों में भी, बढ़ गया है डर!
यह लोकतंत्र का तमाशा१
सुनिए साहब! घर की साड़ी, फटी हुई है जेब,
महँगाई की भट्टी में, जलता अपना देश।
जलती है ये रोटी भी, जैसे कोई सपना,
'मानस' खड़ा सोचता, क्या बचा है अपना?
यह लोकतंत्र का तमाशा२
पत्नी बोली- "सुनिए जी, सब्जी में नमक कम है,"
मैंने कहा- "नमक तो है, पर बजट में ही दम है।
वो बोले कि 'अच्छे दिन' आएंगे घर चलकर,
हम तो खड़े हैं आज भी, लोन की किस्तें लेकर!"
यह लोकतंत्र का तमाशा३
नेता जी का भाषण देखो, लगता बड़ा कमाल,
विकास की इस गाड़ी में, 'मानस' हुआ बदहाल।
'मानस' हुआ बदहाल, पगार तो बस एक छलावा,
झूठ बोलने का देखो, कैसा मीठा बुलावा।
यह लोकतंत्र का तमाशा४
व्यवस्था का ये ढाँचा है, सड़ता हुआ एक लाश,
'मानस' की फाइलों में, खत्म हुई हर आस।
कुर्सी पर बैठे बाबू, जैसे पत्थर के भगवान,
फाइल आगे बढ़ती नहीं, मांगते हैं ये दान।
ये लोकतंत्र नहीं, बस एक तमाशा है पुराना,
'मानस' यहाँ मजबूर है, सच का सच बताने को!
यह लोकतंत्र का तमाशा५
दुनिया कहती- "डिजिटल बनो, हर काम हो जाएगा,"
मैंने कहा- "ऑनलाइन तो बस, अपना बीपी बढ़ जाएगा।"
फिल्टर लगा के चेहरे पर, सब बनते हैं यहाँ 'रईस',
'मानस' असली चेहरा लेकर, ढूंढ रहा है अपनी फीस।
हँस लो जरा खुलकर, क्योंकि रोने का भी टैक्स है,
'मानस' की जिंदगी अब, एक उलझा हुआ 'फॅक्स' है!
'मानस' का वायरल सच
महँगाई के साए में, 'मानस' हुआ बेहाल,
जेब में अपने छेद है, और बाहर सब मालामाल।
पत्नी बोली- "सुनिए जी, राशन का क्या होगा?"
मैंने कहा- "चिंता मत कर, ये बजट ही सबको खाएगा!"
ये सरकारी फाइलें भी, बड़े नखरे दिखाती हैं,
'मानस' की मेहनत पे, खुद ही इठलाती हैं।
बाबू बोले- "साहब अभी, मीटिंग में व्यस्त हैं,"
अरे! मीटिंग में तो बस, चाय की चुस्की का ही हस्त है।
सोशल मीडिया पर सब, 'फिट' नजर आते हैं,
फिल्टर लगा के चेहरे, सबको भरमाते हैं।
'मानस' ने भी सोचा, चलो थोड़ा स्मार्ट बनूँ,
कैमरा ऑन किया, तो लगा मैं खुद ही सबसे बड़ा 'कार्टून' हूँ!
अब आप ही बताओ, हँसें या फिर रो लें हम?
इस महँगाई के दौर में, कहाँ-कहाँ से हो लें हम?
अगर 'मानस' की ये बात, आपको लगी हो सही,
तो लाइक-शेयर कर दीजिए, वरना नाराज़गी तो सही!
चेहरे पर मुस्कान
"लोग कहते हैं 'मानस', आजकल चेहरे पर बड़ी मुस्कान है,
मैंने कहा- भाई, ये महँगाई का असर है, अब रोने में भी बड़ा नुकसान है!"
दफ्तर गया तो बॉस बोले- "मानस, काम पेंडिंग क्यों है?"
मैंने कहा- "सर, काम तो होता रहेगा, पर ये सरकारी फाइलें,
जैसे मेरे पड़ोसी का दिमाग, बड़ी स्लो मोशन में है!"
पत्नी ने लिस्ट थमाई, तो लगा जैसे 'यमराज' का बुलावा,
महँगाई के साए में, अब तो प्याज भी हुआ दिखावा!
सोशल मीडिया पर सब, 'फिल्टर' लगा के 'स्टार' बने,
'मानस' बेचारा अपना, असली चेहरा लेकर ही खड़ा रहे।
अरे! हँस लो थोड़ा खुलकर, क्योंकि हँसी अभी भी मुफ्त है,
वरना कल को इस पर भी, सरकार का ही टैक्स है!
"बात सही लगी हो, तो 'मानस' को फॉलो जरूर करना,
'मानस' और रिश्तेदारी का मायाजाल
"रिश्तेदार घर आ जाएं, तो समझो 'आफत' का आना है,
'मानस' के घर में आज, बिना बुलाए बारात का जमाना है!"
फूफा जी आए, पूछे- "बेटा, अब क्या करते हो?"
मैंने कहा- "वही जो आप कर रहे हैं, बस मुस्कुराते हुए मरते हैं!"
तभी बुआ जी बोलीं- "फेसबुक पर फोटो कम डाला करो,
लोग नजर लगा देंगे, थोड़ा तो संभला करो!"
मैंने कहा- "बुआ जी, असली चेहरा तो हम, 'फिल्टर' के पीछे छोड़ आए,
ये जो आप देख रही हैं, ये तो बस 'नेटवर्क' के साए!"
दुनिया दिखावे की है, और हम सादगी का चश्मा पहने,
'मानस' फँसा पड़ा है, इनके तर्कों के गहने।
अरे! अब तो बस, फोन बंद करके सो जाना बेहतर है,
वरना इन रिश्तेदारों के, किस्सों में ही अपना पूरा शहर है!
"बात में दम लगा हो, तो 'मानस' को शेयर करना,
और ऐसे 'रिश्तेदारों' से, थोड़ा बचकर ही रहना!"
'मानस' का फिटनेस मिशन
"जीम जाने का जुनून ऐसा, कि 'मानस' का दम फूल गया,
फिट होने के चक्कर में, आदमी अपना सुकून ही भूल गया!"
सुबह उठते ही 'मानस' ने, सलाद की थाली सजाई,
दो निवाले खाए तो, याद आई वो हलवाई की मिठाई।
ट्रेनर बोला- "सर, प्रोटीन शेक पियो और वजन घटाओ,"
मैंने कहा- "भाई, प्रोटीन के भाव में, मैं अपना घर बेच आऊं?"
घर आकर देखा तो, पत्नी ने पिज़्ज़ा मँगा रखा था,
'मानस' की डाइट का सारा, प्लान ही हिला रखा था!
इंसान फिट नहीं, बस 'एप्लीकेशन' का गुलाम हो गया,
कितने कदम चले आज, इसका ही बस नाम हो गया।
अरे! फिट वो भी है, जो मेहनत की रोटी खाता है,
'मानस' तो बस ये देख के, मन ही मन हँस जाता है!
"अगर ये डाइट वाला सच, आपको भी सताता है,
तो 'मानस' के पेज को, अभी फॉलो कर जाता है!"
'मानस' का ऑनलाइन धोखा
"ऑनलाइन मंगाया था 'मानस' ने, एक बड़ा शानदार सूट,
डिब्बा खुला तो मिला, वहाँ बस प्लास्टिक का एक बूट!"
फोटो में तो चमक थी, जैसे कोई शाही दरबार हो,
पर हाथ में आया तो, लगा जैसे किसी कबाड़ का हार हो।
कस्टमर केयर को फोन किया, तो बोले- "थोड़ा धैर्य रखिए,"
मैंने कहा- "धैर्य तो खत्म है, अब मेरी रकम वापस कीजिए!"
रिटर्न करने बैठे तो, शिपिंग चार्ज ही बड़ा भारी है,
'मानस' की ऑनलाइन शॉपिंग, अब पूरी दुनिया पर भारी है!
तस्वीरें सब झूठ हैं, और 'ऑफर' भी एक जाल है,
'मानस' अब समझ गया, ये डिजिटल खरीदारी का हाल है।
अरे! बाजार जाकर खरीदो, ताकि हाथ से तसल्ली हो,
वरना घर बैठकर, आपकी जेब की खूब खली-बली हो!
"अगर आपके साथ भी, ऐसा ही कुछ हुआ है,
तो 'मानस' के पेज को शेयर करना न भूलना!"
'मानस' और सड़कों का रण
"गाड़ी स्टार्ट करते ही 'मानस' का, पारा चढ़ जाता है,
सड़क पर निकलते ही, हर इंसान 'युधिष्ठिर' से 'भीम' बन जाता है!"
लाल बत्ती पे खड़ा होकर, मैं संयम का पाठ पढ़ता हूँ,
बगल वाला हॉर्न बजाए, तो मैं भी अपना धैर्य खोता हूँ।
कोई 'रॉन्ग साइड' से आता है, जैसे उसे यमराज ने बुलाया हो,
मैंने पूछा भाई साहब, क्या आपने रास्ता घर से ही बनाया हो?
वो बोले- "मानस, जल्दी में हूँ, अपनी मर्जी की सरकार है,"
सड़क पर नियम नहीं, बस 'हॉर्न' का ही अधिकार है!
ट्रैफिक पुलिस की सीटी, जैसे संगीत का कोई शोर है,
'मानस' अपनी मंज़िल ढूंढे, पर हर तरफ बस 'टोर' है।
अरे! गाड़ी तो पहुँचती है, पर सुकून कहीं खो जाता है,
सफर का मज़ा तो छोड़ो, 'मानस' बस तनाव ही साथ लाता है!
"अगर ट्रैफिक में आपका भी, ऐसा ही हाल होता है,
तो 'मानस' के इस वीडियो को, शेयर करना ना भूलना!"
शीर्षक: 'मानस' का शादी-समारोह
"शादी का कार्ड मिला 'मानस' को, जैसे कोई भारी वारंट आया है,
लिफाफे के अंदर निमंत्रण नहीं, 'तुलना' का बड़ा सामान आया है!"
लिस्ट बनी है तोहफों की, कि किसे क्या देना है,
बजट मेरा है छोटा सा, पर सबको खुश करना है।
रिश्तेदार के लिफाफे में, हजार रुपए का 'शगुन' डाला,
बदले में मिला 'मानस' को, काजू का एक सूखा सा प्याला!
खाने की लाइन में लगे, तो पसीने में नहाए हैं,
पनीर की खोज में हम, तीन चक्कर लगा आए हैं।
दूल्हे के दोस्त चिल्लाए- "जल्दी खाओ, फोटो खिचवानी है,"
अरे! 'मानस' को तो बस, अपनी भूख मिटानी है!
तैयार होकर गए थे हम, बनकर बड़े मेहमान,
वापस आए तो लगा, छिन गई है अपनी शान।
शादी है मिलन का पर्व, या दिखावे का एक मेला?
'मानस' सोचता है, जेब खाली कर के क्यों, लौट रहा हूँ अकेला!
"अगर शादी के खाने में, आपका भी ऐसा ही हाल होता है,
तो 'मानस' को शेयर कर, इस हंसी को साझा करना न भूलना!"
बिजली-पानी का बिल और 'मानस'
"बिजली का बिल आया घर, तो 'मानस' कांप गया,
पंखे की हवा में भी, अब तो डर नाप गया!"
मीटर दौड़ता ऐसे, जैसे कोई रेसर हो भाई,
'मानस' ने तो बस, एक बल्ब की रोशनी जलाई।
साहब कहते हैं- "आपने एसी तो नहीं चलाया?"
मैंने कहा- "सर, मैंने तो बस, गर्मी में पसीना ही बहाया!"
बिल देख के लगता है, जैसे चाँद पर घर लिया है,
'मानस' ने अब तो, मोमबत्ती से ही नाता जोड़ लिया है!
"अगर बिल देख के आपको भी, झटका लगता है भाई,
तो 'मानस' को फॉलो कर, शेयर की बत्ती जलाओ भाई!"
घर की मरम्मत और कारीगर
"कारीगर बोला 'मानस' से- कल पक्का काम हो जाएगा,
वो 'कल' आया नहीं कभी, और नल भी बहता जाएगा!"
प्लम्बर को फोन किया, तो बोले- "बस रास्ते में हूँ,"
'मानस' खड़ा है नंगे पैर, जैसे मैं ही बस्ती में हूँ।
वो आता है तो औजार छोड़, चाय की फरमाइश करता है,
काम तो होता नहीं, बस पाइप को और सिकोड़ता है।
'मानस' की टूटती छत, अब आसमान को निहारती है,
ये कारीगरों की गैंग, बस 'समय' पे ही वार करती है!
"ऐसे कारीगरों से, अगर आप भी हैं परेशान,
तो 'मानस' के इस वीडियो पे, मारो एक लाइक का बाण!"
नींद और सुबह का अलार्म
"अलार्म की घंटी बजी, तो 'मानस' ने उसको ललकारा,
सोने की इस जंग में, अब तक है खुद का ही सहारा!"
पाँच मिनट का स्नूज़ (Snooze), जैसे जिंदगी का आखिरी मौका,
'मानस' सोता है ऐसे, जैसे मिला हो कोई स्वर्ग का चौका।
दफ्तर जाने की जल्दी, और सपने में हसीन चाय,
अलार्म कहता है- उठ जाओ, वरना बॉस बोलेगा- 'बाय-बाय!'
मजबूरी में उठा हूँ, पर मन अभी बिस्तर में सोता है,
'मानस' की ये सुबह, वाकई बहुत 'जुल्मी' होता है!
"अगर सुबह उठते ही, आपको भी मौत आती है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, दोस्तों को जरूर सुनाती है!"
बैंक की लंबी लाइनें (KYC का चक्कर)
"बैंक की लाइन में 'मानस' खड़ा है, जैसे खड़ा हो कोई अपराधी,
KYC के नाम पर यहाँ, खत्म हो जाती है सादगी और आजादी!"
अंदर जाते ही बाबू बोले- "फॉर्म का कॉलम छोटा है,"
'मानस' बोला- "सर, मेरा तो पूरा जीवन ही खोटा है!"
आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल लाए,
बाबू बोले- "फिर आओ, जब धूप में पसीना सूख जाए।"
लाइन में खड़े-खड़े, अब बाल भी सफेद हो गए,
'मानस' की आधी उम्र, बैंक की चौखट पे ही सो गए।
"अगर बैंक की लाइन ने, आपको भी रुलाया है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, दोस्तों को जरूर दिखाया है!"
घर में घुसते ही 'वाइ-फाई' (Wi-Fi) का झगड़ा
"घर में घुसते ही 'मानस' ने, पहले पासवर्ड माँगा,
बीवी बोली- 'पहले काम तो कर', तो 'मानस' का दम भागा!"
इंटरनेट चला गया तो, जैसे घर में सन्नाटा छा गया,
'मानस' का पूरा डिजिटल संसार, जैसे कहीं खो गया।
बीवी देख रही रील, बच्चा गेम में लगा है बड़ा,
वाइ-फाई की स्पीड पे, पूरा परिवार ही अड़ा है।
मैंने कहा- 'थोड़ी देर तो, आपस में बात कर लो',
सब बोले- 'मानस', पहले राउटर को तो ठीक कर लो!'
"अगर घर में इंटरनेट, इंसान से ज्यादा प्यारा है,
तो 'मानस' के इस वीडियो पे, शेयर का बटन ही सहारा है!"
रिश्तेदारों का 'ज्ञान' और सोशल मीडिया
"फेसबुक पर 'मानस' ने डाली, एक नई फोटो मुस्कान के साथ,
बुजुर्ग रिश्तेदार बोले- 'बेटा! क्या यही रह गया है, तेरे हाथ?'"
फोटो में मैं स्मार्ट, और दुनिया में बड़ा 'कूल' हूँ,
रिश्तेदार के कमेंट से, लग रहा मैं 'मूर्ख' का फूल हूँ।
लिखते हैं- 'बेटा, पूजा-पाठ पे भी कभी ध्यान दिया कर,'
मैंने कहा- 'अंकल, फेसबुक की शांति के लिए, मुझे भी चैन दिया कर!'
सोशल मीडिया पे 'मानस', अब एक 'युद्ध' लड़ रहा है,
अपनी प्राइवेसी बचाने को, हर रिश्तेदार से लड़ रहा है!
"अगर रिश्तेदारों की कमेंट्स से, आपको भी खुजली होती है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, अपनी वॉल पे जरूर बोती है!"
'हेल्थ कॉन्शियस' पड़ोसी
"पड़ोसी मेरा सलाद खाकर, बड़े ज्ञान देता है,
'मानस' को देख के वो, 'हेल्थ' का दान देता है!"
वो बोले- "मानस, घी छोड़ो, थोड़ा कड़वा जूस पिया करो,"
मैंने कहा- "भाई, जिंदगी कड़वी है, कम से कम जीभ तो जिया करो!"
वो रोज सुबह दौड़ते हैं, जैसे कोई यमराज पीछे पड़ा हो,
और मैं बालकनी में खड़ा होकर, चाय की चुस्की पे ही अड़ा हूँ।
पड़ोसी की फिटनेस का, जलवा बड़ा भारी है,
पर उनके फ्रिज में भी, 'पिज़्ज़ा' की ही बारी है!
"अगर ऐसे ज्ञानी पड़ोसी, आपको भी मिले हैं भाई,
तो 'मानस' का ये वीडियो, दोस्तों को जरूर दिखाई!"
'फोन की गैलरी' का कचरा
"मानस की गैलरी में, कचरे का अंबार है,
सुबह-सुबह 'गुड मॉर्निंग' का, ही तो ये त्यौहार है!"
व्हाट्सएप की सेटिंग में, ऑटो-डाउनलोड ऑन है,
गैलरी में पड़ा, अब तो मोबाइल भी 'डाउन' है।
दस फोटो 'गुड मॉर्निंग' की, और बीस 'फॉरवर्ड' ज्ञान,
'मानस' ढूंढता है अपनी फोटो, पर मिल नहीं रही जान!
फोन भर गया है साहब, डिलीट करते-करते हाथ दुख गए,
ये 'फॉरवर्ड' करने वालों के, तार ही अब तो झुक गए!
"अगर आपका फोन भी, मैसेज से भर जाता है प्यारा,
तो 'मानस' का ये वीडियो, शेयर करके जगाओ अपना यारा!"
'सस्ते के चक्कर में' (Online Sale)(फ्लैश सेल का 'धोखा')
"'मानस' को सेल दिखी, तो मन में उठा तूफान है,
सस्ते के चक्कर में फँसा, और बन गया 'परेशान' है!"
'फ्लैश सेल' शुरू हुई, और मैंने बटन दबाया,
पर वो 'आउट ऑफ स्टॉक' का, पैगाम हाथ में आया!
पचास प्रतिशत की छूट थी, पर सामान तो था ही नहीं,
'मानस' का ये 'ऑनलाइन शॉपिंग' वाला, कोई ईमान ही नहीं।
घंटों बर्बाद किए, और मिला बस एक 'थैंक्स' का मैसेज,
अब तो 'मानस' करता है, शॉपिंग पर ही एतराज का रिसेस!
"अगर 'फ्लैश सेल' ने, आपको भी चूना लगाया है,
तो 'मानस' के पेज को फॉलो कर, अपना दुख जताया है!
'महंगे रेस्टोरेंट का ड्रामा'(हर मध्यमवर्गीय इंसान की हकीकत)
"बड़े रेस्टोरेंट में 'मानस' ने, एक पिज्जा ऑर्डर किया,
बिल देखकर तो लगा, जैसे पूरा बैंक ही खाली किया!"
वहाँ का पानी है 'मिनरल', और वेटर है 'वीआईपी',
'मानस' वहाँ बैठ के, बस अपनी ही किस्मत को पी!
वो सूप में मिलाते हैं, बस दो बूंद कोई 'अजीब घास',
नाम है 'ऑर्गेनिक' उसका, पर स्वाद है बिल्कुल बकवास।
बिल में जो 'सर्विस चार्ज' है, वो दिल में चुभता है,
'मानस' घर आकर, फिर 'मैगी' में ही खुश होता है!
"अगर रेस्टोरेंट के खाने में, आपको भी स्वाद नहीं आता,
तो 'मानस' का ये सच, सबको शेयर कर के सुनाता!"
'सरकारी फॉर्म की भूलभुलैया'(जहाँ 'मानस' का दिमाग चकरा जाता है)
"सरकारी फॉर्म भरना 'मानस' के लिए, महाभारत का युद्ध है,
कॉलम ए-बी-सी में, दिमाग ही तो पूरा शुद्ध है!"
'आधार' का लिंक माँगा, तो 'पैन' का नंबर खो गया,
'मानस' फॉर्म भरते-भरते, खुद ही उलझ के सो गया।
वो पूछते हैं- 'आपका पिता का नाम, और दादा का बचपन का ठिकाना',
अरे! फॉर्म भरवा रहे हो, या मेरी पूरी खानदान की दास्तान सुनाना?
सबमिट बटन दबाया तो, आया 'एरर' (Error) का संदेश,
'मानस' का तो अब, फॉर्म भरते-भरते ही निकल गया भेष!
"अगर सरकारी फॉर्म ने, आपको भी परेशान किया है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, लाइक करके अपना दर्द साझा किया है!"
'बढ़ती उम्र और चश्मे का खेल'
(यह वह स्थिति है जब 'मानस' को समझ नहीं आता कि चश्मा कहाँ गया)
"आँखों पे लगा 'मानस' ने, एक बड़ा सा चश्मा पाया,
पर चश्मा ढूंढने में ही, आधा दिन निकल आया!"
हाथ में मोबाइल है, और आँखों पे चश्मा रखा है,
'मानस' ढूंढ रहा चश्मा, जैसे कोई खजाना बिखरा है!
पढ़ने बैठूँ तो दिखता नहीं, बिना उसके अक्षर सारे,
पहना तो लगा, जैसे धुंधले हो गए सितारे।
कभी माथे पे चढ़ता, तो कभी गले में लटक जाता है,
'मानस' की उम्र का ये चश्मा, अब अपनी ही धाक जमाता है!
"अगर चश्मा ढूंढते-ढूंढते, आपको भी आती है हंसी,
तो 'मानस' का ये वीडियो, शेयर करना अभी के अभी!"
'त्यौहारों की सफाई का खौफ'
(वह समय जब घर के कोने-कोने में 'मानस' को सफाई करनी पड़ती है)
"त्यौहार आया तो घर में, सफाई का भूकंप आया है,
'मानस' की पीठ का तो, अब बुरा हाल हो आया है!"
पत्नी कहती है- 'मानस', अलमारी के पीछे झाड़ू लगाओ,
मैं बोला- 'देवी जी, इससे अच्छा तो मुझे जेल ही भिजवाओ!'
मकड़ी के जाले साफ़ करते, मैं खुद एक जाले जैसा हो गया,
घर का कोना-कोना साफ़ करते, मेरा तो वजूद ही खो गया।
त्यौहार तो खुशियों के हैं, पर सफाई का ये डर कैसा,
'मानस' तो अब सफाई देख के, सो जाता है हो के बेबस-सा!
"अगर सफाई के नाम पर, आपको भी बुखार आता है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, दोस्तों को जरूर दिखाया है!"
'रिटायरमेंट' का सपना बनाम हकीकत
(वह समय जब 'मानस' सोचता है कि अब तो मौज होगी)
"रिटायरमेंट के बाद 'मानस' ने, सपने बड़े सजाए थे,
पर घर पहुँचते ही, कामों के ढेर सारे पहाड़ आए थे!"
सोचा था सुबह देर तक सोऊँगा, और अखबार पढ़ूँगा चैन से,
पर पत्नी बोली- 'अब समय मिला है, राशन ले आओ पैर से!'
'मानस' की आजादी का, बस एक दिन ही जश्न चला,
अगले ही दिन से, घर का 'कामकाजी' चक्र चला।
पेंशन का पैसा भी, अब घर की मरम्मत में जाता है,
'मानस' का रिटायरमेंट, बस 'अरेस्ट' (Arrest) जैसा नजर आता है!
"अगर रिटायरमेंट के बाद, आपको भी काम ही काम मिलता है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, शेयर करके अपना दर्द मिलता है!"
'बच्चों के साथ स्मार्ट बनने की कोशिश'
(वह जंग जहाँ 'मानस' हार जाता है)
"बच्चों को लगा 'मानस' बड़ा, 'पुराने खयालात' वाला है,
मैंने कहा- बेटा, इस 'स्मार्टफोन' से बड़ा तो, मेरा दिमाग ही निराला है!"
मैं सिखाने चला उन्हें, 'दुनियादारी' और 'संस्कार',
वो सिखाने लगे मुझे, 'इंस्टाग्राम' के नए 'रफ्तार'!
मैंने कहा- 'यह बटन क्या है?', बोले- 'बाबा ये फिल्टर है',
मैंने देखा तो लगा, चेहरा ही हो गया 'सिल्वर' है!
उनकी भाषा है 'कोड' (Code), और मेरी भाषा 'ज्ञान' है,
'मानस' फँसा है बीच में, जहाँ जनरेशन का 'तूफान' है!
"अगर बच्चों के आगे, आपकी भी 'स्मार्टनेस' फेल हो जाती है,
तो 'मानस' की ये बात, सबको खूब भाती है!"
'ब्रांडेड कपड़ों का चक्कर'
(वह दिखावा, जिसमें जेब कट जाती है)
"ब्रांड के नाम पर 'मानस' ने, एक टी-शर्ट बड़ी महँगी ली,
धोते ही वो सिकुड़ गई, जैसे निकली उसकी जान की कली!"
दुकानदार बोला- 'सर, ये तो प्रीमियम क्वालिटी का ब्रांड है',
'मानस' ने भी जेब खोली, जैसे कोई बहुत बड़ी 'कमांड' है।
एक बार पहना तो लगा, मैं खुद में कोई 'स्टार' हूँ,
धोया तो लगा, अब तो बस 'कपड़े के टुकड़े' का ही भार हूँ।
ब्रांड की चमक तो, पानी में ही बह गई,
'मानस' की वो हजारों की नोट, बस यादों में रह गई!
"अगर ब्रांड के चक्कर में, आपको भी चूना लगा है भाई,
तो 'मानस' के इस वीडियो को, शेयर कर के सब को बताओ भाई!"
'बारिश और ऑफिस का सफर'
(जब बारिश 'मानस' के सारे प्लान चौपट कर देती है)
"बारिश आई तो 'मानस' का, ऑफिस जाने का जोश मर गया,
जूते भी भीगे, और पूरा दिन ही तनाव से भर गया!"
छाता लेकर निकला तो, हवा ने उसे ही मोड़ दिया,
जैसे ऊपर वाले ने, मेरी किस्मत से ही नाता तोड़ दिया।
बस पकड़ने की रेस में, मैं तो कीचड़ में ही नहा गया,
ऑफिस पहुँचा तो लगा, मैं 'नदी' से ही हो कर आ गया!
बॉस बोले- 'लेट क्यों हो?', मैंने कहा- 'सर कुदरत का करिश्मा है',
'मानस' की ये बारिश वाली ज़िंदगी, बस एक 'भीगा हुआ' किस्सा है!
"अगर बारिश में ऑफिस जाना, आपको भी सजा लगती है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, दोस्तों को खूब जचती है!"
'तारीफ' का भूखा इंसान
(सोशल मीडिया पर लाइक्स की भूख)
"फोटो डाली तो 'मानस' ने, लाइक्स का इंतज़ार किया,
पर 5 लाइक देख के ही, दिल ने खुद पे वार किया!"
स्टेटस डाला- 'आज मैं खुश हूँ', पर अंदर से उदास है,
लोगों की वाह-वाही में ही, 'मानस' की सारी प्यास है।
कमेंट नहीं आए तो लगा, दुनिया मुझसे ही रूठ गई,
'मानस' की ये आभासी दुनिया, बस एक धागे पे टूट गई।
अरे! हकीकत की दुनिया में भी, कभी जी कर तो देखिए,
'मानस' की मुस्कान के लिए, असली दोस्तों को तो देखिए!
"अगर लाइक्स के पीछे, आप भी पागल हो रहे हैं भाई,
तो 'मानस' का ये वीडियो, लाइक करके सच्चाई अपनाई!"
'मच्छरों का आतंक' (रात की जंग)
(यह वह युद्ध है जिसे 'मानस' कभी नहीं जीत पाता)
"मच्छर ने किया 'मानस' पे, रात भर में ही हमला भारी,
नींद गई और गई चैन, बस बची है खरोचें सारी!"
मच्छर का वो गाना, जैसे कान में कोई रेडियो बजता है,
'मानस' हाथ चलाता है, पर मच्छर बस हँसता है।
'ऑल-आउट' (All-out) भी बेअसर, और कॉइल का भी दम निकल गया,
पूरी रात बीत गई, पर 'मानस' का चैन ही फिसल गया।
सुबह उठा तो लगा, जैसे किसी युद्ध का मैं सेनापति हूँ,
मच्छरों के काटने के बाद, अब तो बस एक 'छलनी' हूँ!
"अगर मच्छरों ने आपकी भी, रातों की नींद उड़ाई है,
तो 'मानस' का ये वीडियो, शेयर करके अपनी भड़ास दिखाई है!"
😅 सच बताऊं तो 'मानस' के साथ भी यही होता है। क्या आपके साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ है?
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कभी हँसते-हँसते, तो कभी सोचते-सोचते! आज की यह कविता हमारी रोज़मर्रा की एक कड़वी सच्चाई को बयां करती है। अगर आपको लगा कि यह कहानी आपकी अपनी है, तो दिल खोलकर हँसिए और शेयर कीजिए!
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manascharcha
।। जय श्री राम जय हनुमान।।